वर्दी
दिल से चाहा जिसे उसको अपना ना सके सपना देखा जिसका उसको पा ना सके मोहब्बत की जिससे उसको बता ना सके आशिक ना समझना यारो हमे , हम तो घायल परिंदे है हम मेरिट लिस्ट से बाहर हुए वो ,असफल विधार्थी है ना जाने कितने प्रयास, व्यर्थ हुए जिनके , जिनकी मेहनत को एक नाकामयाबी मे तोला गया जिसने ना जाने कितनी, राते खोई है फिर भी हर नाकामयाबी अपने माथे से लगाई है , कभी पेपर लीक हुए कभी हम बीमार हुए कभी सेंटर पर व्यवस्था खराब रही , फिर भी हम डटे रहे एक वर्दी थी जिसे दिल और जान से चाहा हार चुके थे फिर भी हम मैदान मे डटे रहे , इतनी मेहनत के बाद भी हम असफल रहे, जिसे चाहा ,उसे ही पा ना सके दुनिया के लिए हम आशिक नही नाकामयाब बने रहे, एक वर्दी थी जिसकी चाहत में हम हर हाल मे डटे रहे || # स्वर्णाक्षी सिंह
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