बदलाव!
तु अब भी ज़ेहन मैं है, तू याद आना भी लाझमी है, तु अब भी जेहेन मैं है, तू याद आना भी लाज़मी है, फ़र्क बस इतना है, के वो सुरुर अब चेहरे पर बायां नही होता..... _स्वयं
Ad
Poetry Books 50% Off
Bestselling collections from top poets
Shop Now →
तु अब भी ज़ेहन मैं है, तू याद आना भी लाझमी है, तु अब भी जेहेन मैं है, तू याद आना भी लाज़मी है, फ़र्क बस इतना है, के वो सुरुर अब चेहरे पर बायां नही होता..... _स्वयं
Poetry Books 50% Off
Bestselling collections from top poets