शीर्षक- सफल यात्रा
मापनी-- 222-122, 1222 जाना है मुझे अब, इधर आना। जबतक मैं यहाँ हूँ , ठहर जाना।। फिर मेरा कहाँ क्या, ठिकाना है । कहना अति कठिन जो, बताना है।। आओ तो जरा अब, मिटे शिकवे। क्षण भर प्रेम जो दे, सही हित वे।। मानव सब रहो मिल,कहा मानो। झगड़े दुश्मनी यूँ , नहीं ठानो।। दुनिया मात्र मेला, झमेला है। या यह एक उत्तम, तबेला है।। जीना अल्प पर हो, सफल यात्रा। लम्बी आयु मत गिन, गिनो मात्रा।। नरेन्द्र सिंह 21.03.2025
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