शीर्षक :गुण ग्राही बनें
लोग क्या है इसकी खोज क्यों मैं क्या हूँ इसकी पड़ताल हो दूसरों के बारें में खोद-खोद कर जानने की उत्सुकता क्यों अपने खोट को खोट-खोट कर दूर करें। अगर दूसरों में देखना ही है तो उसके गुण को देखें उसके अवगुण उसके हिस्से में छोड़ें मधुमख्खी बनें मख्खी नहीं पुष्प रस पर बैठें घाव के मवाद पर नहीं । नरेंद्र सिंह
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