किरदार
ज़िन्दगी में मेरा किरदार ऐसा है कि जैसे नदी जिस प्रकार नदी निरन्तर बहती रहती है,, इतने विशाल काय पर्वतों को चीरकर आगे बढ़ती रहती है उसी प्रकार मेरा किरदार है ज़िन्दगी में कितनी भी मुश्किलें आये कितनी। भी विपरीत परिस्थितियों का सामना करना पड़ा लेकिन मैंने अपने कर्तव्य को कभी नहीं भूली निरन्तर आगे बढ़ती रही और ईश्वर ने चाहा तो एक दिन उस मुकाम पर पहुचुगी जहां से हजारों लोगों का काम ईश्वर मेरे द्वारा हो या मेरे हाथों से हो 🧿✍️ Janvi ki Kalam se ✍️ ✍️ ✍️ ✍️ ✍️ 🧑⚕️
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