होली आई है
गुजर गया ठंड माघ का रस भर फगुनाहट छाई है, होली आई है.. मिलेंगे रंगों से रंग नए रंगीन सी रुत आई है, होली आई है.. प्यार से जो गले लगे हंस कर गुलाल लगाना तुम, होली का ये पावन अवसर यूं ना व्यर्थ गंवाना तुम, रंगों का ये पर्व है पावन उससे ना घबराना तुम, रंग बदलती इस दुनियां में प्यार का रंग लगाना तुम, फिर से दिल को बच्चा करने की ये रुत आई है, होली आई है.. होली का त्योहार भी देखो कैसे बदला सा लगता है, मेल,प्यार के अभाव में सब फीका सा लगता है, आओ रंगे फिर अपनों के रंग में, भेद सभी मिटाने की वर्ष बाद ये मुहूर्त पाई है, होली आई है.. जो हैं घर से दूर कहीं उनकी भी क्या मजबूरी है, लेकिन पर्व त्योहारों पर हीं मिलना भी बहुत जरूरी है, इस दूरी में ना जाने कितने वर्ष बीत गए, समय के इस काल चक्र ने कितने अपने छीन लिए, लेकिन जब साथ मिलेंगे हम तब होली हो जाएगा, रंग ना सही प्यार के रंग सब रंगीन हो जाएगा, होली के पावन अवसर पर सबको दिल से बधाई है, होली आई है... होली आई है.....
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