हनुअष्टक
●●● रहते अर्ध मिलिंद दृग हृदय बसहीं सियाराम। 'अयन' जहां सियाराम हैं वहां बसैं हनुमान।।1 अतुलित बल के पुंज है ज्ञानियों में अग्रनाम। 'अयन' करें हनुमान को बारम् बार प्रणाम।।2 पावक गगन समीर जल हो गए सब अनुकूल। 'अयन' सुमिर हनुमान को शूल बन गए फूल।।3 अंजनी मां के लाडले ज्ञानी चतुर सुजान। 'अयन' कनक सम देह है सर्व गुणों की खान।।4 सुमिरन को हनुमान के मन बस पारस जान। अल्प बुद्धि है 'अयन' गुण कैसे करें बखान।।5 राम नाम जपते सदा चरण कमल में ध्यान। बाल सुलभ मन 'अयन' के हृदय बसें हनुमान।।6 रोग शोक बाधा 'अयन' इस जग में भरपूर। सुमिरन कर हनुमान का रहें सभी दुख दूर।।7 कोटि सूर्य सम दिव्यता सर्व गुणों की खान दीन 'अयन' हनुमान का कैसे करे बखान।।8 ●●● ©deovrat 'अयन' 11.04.2024
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