अदभुत जलपरी
रूप की रानी बह चली उठते हुए लहरों के संग फिक्रे सारी पीछे छोड़ अपने ही धुन में दुनिया के रंजिशो से कोसों दूर अपने सपनों के मुकाम की ओड।
Ad
Poetry Books 50% Off
Bestselling collections from top poets
Shop Now →
रूप की रानी बह चली उठते हुए लहरों के संग फिक्रे सारी पीछे छोड़ अपने ही धुन में दुनिया के रंजिशो से कोसों दूर अपने सपनों के मुकाम की ओड।
Poetry Books 50% Off
Bestselling collections from top poets