शिकायतें!
शिकायतें बहुत सी करनी हैं तुझसे मैं अब तुझसे मिलना चाहती हूँ हो सके तो अपने दिल में दफना लेना मैं अब तेरी बाहों में मरना चाहती हूँ तेरी एक झलक को तरसाया है तूने सज़ा में तुझे सामने बिठाकर मैं जी भर के देखना चाहती हूं बहुत दिन हुए तेरी आवाज सुने अब तू ही बोलना सारे दिन मैं तेरी बातों में खोना चाहती हूं मेरी मुस्कान के पीछे की उदासी नहीं जान पाया तू, अब तुझसे लिपटकर मैं बस रोना चाहती हूँ छुआ नहीं मैंने कबसे तुझे सज़ा में तू मेरे साथ हो और तेरा हाथ अपने हाथ में चाहती हूँ तू भूल गया शायद लेकिन मैं तुझसे कितना प्यार करती हूँ मिलकर तुझे याद दिलाना चाहती हूँ अब और नहीं रोक पा रहीं मैं खुदको सज़ा में तुझे गले से लगाकर तुझसे तेरी ही शिकायत करना चाहती हूँ! @तेरी_कविता!
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