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सुन, तेरी अधूरी सी नींदों में सपने सजाने आया हु, जो सोई है तू खुद से ही रूठ कर तेरा हाथ पकड़ तुझे जगाने आया हु गर्मी में साया बन तुझे,धूप से बचाने आया हु। सर्दियों की ठंडी हवाओं में,तुझे गर्मी का एहसास। दिलाने आया हु, तेरी सारी तकलीफों को जनता हु मैं, उन्हें मिटाने नहीं,उनसे लड़ना सीखने आया हु। तू घुट घुट के ना जिया कर यू, इन आंसुओं को पानी की तरह न पिया कर तू, तेरे साथ भी अब खड़ा है कोई, तेरा हाथ थामने की जिद में अब अडा है कोई तुझे एहसास दिलाने आया हु, हां! जनता हु पूछेगी ये सवाल कौन हु मैं? क्या चाहता हु? तो बता दूं तुझे, मै तेरी ही परछाई हु और तुझमें समाने आया हु ।
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