तेरी चाहत के घुंघरू
तेरे घुंघरू की चाहत **पत्थर-सा था मेरा दिल, हर लम्हा था सुनसान, इश्क़ से कोई रिश्ता न था, था मैं बस ख़ुद से अंजान। फिर तुम आई जैसे खुशबू, जैसे बरसे सावन का जादू, छू गया दिल का कोना-कोना, तेरे नाम का हर इक सुर बजे दिल मे। सख़्त लोंडा भी पिघल गया, तेरी चाहत के घुंघरू बज.....
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