दोस्त
यूं तो कहने को दोस्त हैं, हम लेकिन क्या अभी भी सच में दोस्त हैं, हम सदियां बीत गई हैं दोनों की बात हुए अब तो याद नहीं जाने कब बात हुई क्या पहले भी ऐसा होता था तू मुझसे बात किए बिना भी रह पाता था तब तो हर बात साझा करते थे बेमतलब सी बातों में भी घंटों निकला करते थे फिर क्यों अब वो बात नहीं फिर क्यों तुझको एहसास नहीं कि दोस्त तेरा तुझको याद करता होगा तेरे यूं बदल जाने पर हजारों सवाल मन में ही बुनता होगा क्या तुझको तेरा दोस्त याद नहीं या अब बात करने जैसा कुछ ख़ास नहीं अब तो तू दूर से ही देखकर चला जाता है क्या यही दोस्ती का नाता है बिन बात किए कैसे तू रह पाता है तू तो ऐसा न था,हर एक बात पर हजारों बातें किया करता था अब तो ख़ुद ही सोच में पड़ जाता हूं दोस्त तो है लेकिन दोस्त से मिल नहीं पाता हूँ यूं तो कहने को दोस्त हैं, हम लेकिन क्या अभी भी सच में दोस्त हैं, हम
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