नैना 👀
कि सुबह हो कर खुद को सीसे में निहारते है ये नैन ही तो है जो हमें हमसे मिलाते है उगते सूरज को रात में चमकते चाँद को दिन को शाम को जो अपनों को खुश देख कर मिले उस आराम को जो तुम्हारी आँखों में पढ़ लू अपने उस नाम को। कभी खुशी तो कभी गम के एहसास को अपने सपनों के पीछे लगे लोगो के प्रयास को इंसानियत के चलते उस मदद के अगाज को कभी रुलाते है कभी हसाते ये नैन ही तो जो बहुत कुछ देख कर भी अनदेखा कर देते हैं। औरों से लगी उम्मीदों को टूटते देखते है अपनों को अपनों से रूठते देखते है गैरों को मजा लूटते देखते है गम के सहलाब को फूटता देखते है कि यारों को महफ़िल में झूमता देखते है उनका हमसे रुठना देखते है इस जीवन के चक्रव्यू को घूमता देखते है अखिर में नैनो को मुद्धा देखते है। ये नैन ही तो है जो बहुत कुछ देख कर अनदेखा कर देते हैं।👀🤌❤️
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