प्यास
कुछ पूर्ण कुछ अधूरा सा कुछ तृप्ति कुछ प्यास अभी भटकते भटकते कहीं पहुंचे मनवा अरमानों की राह यही । सब कहां मिलता है जो चाहो सब मिल जाए तो जीवन नहीं अधूरा होना ही तो अस्तित्व है सब मिल जाने से मुक्ति भय। और मुक्ति तो मृत्यु है मृत्यु मतलब निर्जीवता सब सजीवता के लिए जीते निर्जीवता से लगता डर प्रिय। तभी तो कामना है ईश से प्यास बढ़ती रखे खिंच के जब तक साँस है अधूरा रहूं प्रयास करूं हारता जीतता रहूं। अधूरापन ही तो प्रीत है प्रेरणा यही व मनमीत है दिल कहां भरता है प्रीत से यही जीवन यही अस्तित्व है।
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