रामराज्य ऐसा था
रामराज्य का अजब युग था, किसी को नहीं,कोई दुख था। पिता के रहते, न पुत्र मरते थे, सभी अमन-चैन से रहते थे। दैहिक,दैविक व भौतिक ताप, कहीं न था, त्रेतायुग में व्याप्त। ऊंच-नीच का, न भेद-भाव था, न कोई रंक,नहीं कोई राव था। तन-मन से सभी सुखी-सन्तुष्ट, राज्य की प्रजा थी, निरोगी पुष्ट। सर्वोत्कृष्ट न्याय व्यवस्था थी तब, विवेकी और नेकी प्रजा थी सब। भय व अपराध से मुक्त था शासन, चतुर्दिक शांति थी, था अनुशासन। नरेंद्र सिंह 04.01.2023
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