भीगी पलके
नम आंखों से कोई बात कही नहीं जा रही गले तक भर आई है अब सही नहीं जा रही कहने दो सबसे रहने दो अबसे हिम्मत नहीं हो पा रही नम आंखों से कोई बात कही नहीं जा रही क्यों में हु सब के दुख की वजह मेरे दुख की भी तो होगी वजह में ही क्यों परवाह करू किसीकी मेरी भी तो कोई परवाह करे बस दिल की बात कह नहीं पा रही नम आंखों से कोई बात कही नहीं जा रही में क्यों दर्द महसूस करू किसीका मेरा दर्द कम है क्या कोई सुनु किसी की शिकायत मेरी खफा कम है क्या ये दस्तूर का गहना पहन नहीं पा रही नम आंखों से कोई बात कही नहीं जा रही
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