जलन
जलन ===================== जलन ईन्सांन को , आदमी से हैवान बानाती है, प्यारभरे दिल को, जलाके, राख कर देती ह। . बंदे पाल मत ईसे, ये एक सच्चे आदमी को, जानवरसे बत्तर बाना देती है। प्यार से सहलाके पाला है, माॅबापने तुम्हे, ऊन की खाविशोको , युही बरबाद न करो, ईस प्यार भरे दील पे, थोडासा रहम तो करो। जातीपातीका छोडो, ईन्सांन की आवलाद होके, हैवानीयत का काम तो छोडो, जालना तो बुरी बात है, पहले ईसे तो छोड दो......., पहले ईसे तो छोड दो। ==================
Ad
Poetry Books 50% Off
Bestselling collections from top poets
Shop Now →
