समय से गुफ्तगु
प्रिय समय.. सब कहते है कि तू सबसे बलवान है, तुझसे ही ये सब रौनक और शान है; तू मुझको जरा बता ऐसा क्या तू पहलवान है , तुझसे भयभीत हर कोई पर फिर भी सब अंजान है। सब कहते है कि तू बदलता ही रहता है , तेरी ही तसल्ली से व्यक्ति बुरे समय को सहता है ; तू किसी के लिए ना रुकता बस चलता ही रहता है । "समय के साथ सब बदल जाता है" दुनिया ये आरोप लगाती है , दूसरों को अपना समझकर उम्मीद लगाती है ; पर जब उनमें अकल आती है , तो तसल्ली के लिए समय को ही बदला हुआ बताती है । लोग कहते है लौटकर नहीं आता वो समय जो गया , तेरे अनुसार ही होता है ये पुराना और नया ; कल था जो अपना आज है पराया, तेरे इस बदलाव को कोई समझ न पाया , समय के साथ बदलती उम्र और काया , आज उठ नहीं पा रहा जिसने कल था सबको हराया , तेरे ये खेल तू ही जाने ओर कोई जान ना पाया, तेरे साथ कोई पीछे हटा तो किसी ने खुद को आगे बढ़ाया । प्रिय समय .. क्या तू बदल जाएगा , आज जो है दुविधा में क्या वो कल हल पाएगा , क्या तू सबको ऐसे ही तस्सली देता जाएगा , या कभी तू रुक भी पाएगा ? आज मैं जो सोच रही कल वो ना मैं सोचूंगी , जो आज पाना चाह रही कल वो पता होते हुए भी शायद ना खोजूंगी । आज जो जरूरी लग रहा मुझे कल शायद मैं वो ना चाहूंगी , क्या समय के साथ मैं भी बदलना चाहूंगी । समय एक सा नहीं रहता , ये सोच कर व्यक्ति हर कुछ है सहता , क्या ये नहीं है तेरी ताकत .. इसलिए ही तू कहलाता बलवान है ।
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