महादेव—अनादि, अनंत, अजेय
दुनिया में कुछ नहीं था—न प्रकाश, न ब्रह्मांड, न विष्णु, न ब्रह्मा, न कोई जीवन का आधार। न सूरज चमकता, न चाँद की चाँदनी थी, न आकाश फैला था, न धरती की रचना हुई थी। पर तब भी महादेव थे—सर्वशक्तिमान, काल के भी काल, शिव ही महान। जिनकी वंदना स्वयं विष्णु करें, जिनकी पूजा स्वयं देवगण करें। जब कुछ नहीं था, तब भी वे थे, जब कुछ नहीं रहेगा, तब भी वे होंगे। भोलेनाथ सरल हैं, पर जब क्रोध आता, तो महाकाल बन, संहार मचाता। कैलाश के वासी, असीम दानी, फिर भी वस्त्र बस एक, योगी महाराज। सवारी नंदी महाराज की, त्रिशूल लिए महादेव विराज। कार्तिकेय और गणेश जिनके पुत्र अपार, मनसा माता और अशोक सुंदरी का स्नेह अपार। जिनकी कृपा से चलता सारा संसार, महादेव से बड़ा कोई नहीं, यही है संसार का सार! भोलेनाथ को मेरा बार-बार प्रणाम, कोटि-कोटि नमन! हर हर महादेव!
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