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कहानी समझी जा चुकी है, अब हूर के द्वारा अब हूर कायरो का शिकार हुआ नही करती, मदहोश रहती थी जिनके लिए अब होश में आकर तो कुछ सहा नही करती नेकी के पथ पर चल बदलेगी वो उस मंजर को जो खंजर की वार से दबा करती थी उल्फत के दीवानों की वो गहरी साजिश अनजानी सी वो जान न पाई मोड़ कर राह अपनी अब नव जीवन जीने है वो आई।
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