अधिग़म
सीखना जरूरी है समन्वय जरूरी है केवल अपनी बात ही नहीं दूसरे को सुनना भी जरूरी है। प्रतिक्रिया कहाँ कितना कब करना है ये समझ जाना बहुत ही जरूरी है हमेशा न एक जैसे दिन मिलेंगे न लोग छुई मुई जैसी प्रवृत्ति से निकलना बहुत जरूरी है। अधिकारों के साथ कर्तव्य भी जरूरी है चुनौतियों के पार लक्ष्य प्राप्ति भी जरूरी है प्रतिकूलता के साथ अनुकूलन का कौशल तनाव को झेलने की क्षमता बढ़ाना जरूरी है । आज से आगे कल की तैयारी भी जरूरी है छोटी छोटी आदतों को बदलना बहुत जरूरी है नए कौशल, सिख, व्यवहार परिवर्तन सीखना है थोड़ी नम्रता, विनय और विद्यार्थी बने रहना जरूरी है। समझने में ही समझदारी है आगे चुनौती बहुत भारी है प्रतिकूलता में ये पाथेय बनेगा व्यक्तित्व निखरेगा , खुशहाली लाएगा।
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