श्लोक
श्लोक, तुम अभी सोलह की हो, पर आँखों में वो चमक है, जैसे किसी तारे की पहली सी दमक है। निडर हो ऐसे, जैसे चट्टानों का सीना, हर मुश्किल को हँस कर है तुमने जीना। तुम्हारी बातों में है इक अलग सी गहराई, समझदारी की जैसे कोई मीठी पुरवाई। हर चीज़ को सीखने की रखते हो तुम लगन, ज़रूर तुम आगे बढ़ोगे, ये कहता है मेरा मन। वो हौसला जो तुम में है, वो अद्भुत कहानी है, लगता है जैसे हर मुश्किल अब आनी-जानी है। सपने जो देखे हैं तुमने अपनी राहों में, यकीन है, रंग भर दोगे तुम इन निगाहों में। मुझे अच्छा लगता है वो आत्मविश्वास तुम्हारा, जैसे कल ही मुट्ठी में कर लोगे जग सारा। तुम खास हो श्लोक, ये जान लो हमेशा, तुम्हारी राहें रौशन हों, यही है मेरी अभिलाषा। -प्रिया तिवारी 😄
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