ओ भगीरथ चरण चिन्हों पर
ओ भागीरथ चरण चिन्हों पर उमड़ते आ रहे हम. ललित लहरों में नया युग, नवल गंगा ला रहे हम. आ रहे हम,आ रहे हम,आ रहे हम.. उच्च हिमगिरि के शिखर पर नया गौमुख खुल चुका है, ढह चुकी चट्टान सारी पाप कर तम धूल चुका है, कलित किरणों बीच माधव, कीर्ति गाथा गा रहे हम. आ रहे हम,आ रहे हम,आ रहे हम सगर के प्रिय पुत्र जो अभिशप्त होकर चल पड़े हैं, उन सभी को प्राण देने प्राण करतल दर खड़े हैं, भूल कर अपराध सारे प्रेम से निपटा रहे हम. आ रहे हम,आ रहे हम,आ रहे हम पंचनद कश्मीर पूरब आ घुसे षड्यंत्रकारी हाथ धरे बैठे रहे तो भूल है भरी हमारी दूर हट जाओ विदेशी आज फिर चेता रहे हम आ रहे हम,आ रहे हम,आ रहे हम स्वाबलंबल हित स्वदेशी, त्याग सादा सौम्य जीवन, एकात्म मानव हो जगत में, धर्म का परिपूर्ण पालन, कर्ज आर्थिक दासता सदा, चंद सब ठुकरा रहे हम आ रहे हम,आ रहे हम,आ रहे हम..!!
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