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- मेरी उलझी हुई बस्ती को यूंही सुनसान रहने दो, खुशियां रास नहीं आती, मुझे यूंही परेशान रहने दो। -तू जो ये दिखाने को हस्ती है, तेरी छुपी तकलीफ किसी सांप की तरह मुझे डसती है। तू एक बार हाथ बढ़ा तो सही, कुछ अपने दिल की बात बता तो सही मै साथ हु तेरे ,तू यकीन करके सुना तो सही माना शायद न कर पाऊं तेरी दूर तेरी सारी तकलीफ को, कुछ पल सुकून के दे पाऊं तो सही, ये जो दोस्ती है तुझसे बेमतलब सी मै हर पल तेरा साथ निभाऊं तो सही।
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