२९/०८/२०२४
मैने तब-तब लिखा जब-जब तुम्हारा ख्याल आया, जब वो हसीन चेहरा मुझे याद आया। नसीब में हो न हो तुम मेरे परवाह किसे? मैं तो इस बात से खुश हूॅं कि ये चेहरा देखने का नसीब पाया, हर वक्त हर लम्हा बस सोचा तुम्हे ख्वाबों में न कोई और आया। नसीब देखो वक्त ने किधर मिलाया, कहता है वो हर किसी के मिलने का एक वजूद है। बस मेरा वाला मुझे मिल न पाया, कहाॅं? क्यों? कब? नहीं पता। बस जब तुम्हें याद किया ये लिखने का ख्याल आया।।
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