सुकून
ढूंढ रहे हो ढूंढ लिया मिला क्या मिले तो बताना उम्र निकल गई ढूंढते ढूंढते नही मिला न अरे खो गया कहीं गुमनाम जगह पर बचे हुए दिन काट लो तनहाई में क्यों अपने आप को मारते हो इस लड़ाई में बड़ा बेदर्दी है वो रोज निकलते हो तलाश में उसकी गए थे न ढूंढने महखाने में मिला क्या मैंने मंदिर मस्जिद भी जाते देखा तुम्हे वहां तो मिला होगा नही मिला इतनी चाहत के बावजूद मुंह फेरा शायद वहम ही था मेरा अगर मिल जाए तो मुझे भी बताना सुना है तुम गंदी जगह पर भी जाकर आए वहां पर भी अपना मूंह काला करवा कर आए कितने बदनाम हुए न तुम फिर भी नही मिला तुम्हे सुना है तुमने खूब धन भी कमाया खरीदना चाहते हो लेकिन नही बिका न वो मुझे पता है घर भी बसा लिया तुमने अपनो से जलील भी खूब हुए न तुम फिर भी नही मिला तुम्हे! वो सुकून है भटकाव से नही ठहराव से मिलेगा वो!
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