चांद चकोर ।
की लिख दो चांद पर कुछ । पर उसे पर भी दाग है ।। की लिख दो आसमान पर । उसमें भी सुराग है ।। कह दो कुछ लफ्जों में उन लम्हों की यादें जिनका रिश्ता हमारे लिए बहुत खास है । न जाने वह किस वक्त की बात है।। क्या वह उस वक्त की बात है। जब लम्हे थम जाए यादों में लफ्ज़ निकले तेरी यादों में मिल जाओ तुम तो आसमां झुक देंगे जमीन उठा देंगे फलक पर बैठा देंगे क्या वह उसे वक्त की बात है।। कह दिया मैंने बहुत कुछ गलत सुना भी है मैंने कुछ गलत क्या मैंने सुनी है कोई अच्छी बातें क्या तुम्हें याद है कुछ मेरी अच्छी बातें । क्या तुम्हें याद है वह मुलाकातें क्या तुम्हें याद है वह चाय की टपरी की बातें क्या याद है तुम्हें नन्ही नन्ही शरारत क्या याद है तुम्हें उन दिनों की बातें।। वक्त की दौड़ पर दौड़ चले तुम न जाने तुम हमें कब पीछे छोड़ चले तुम वक्त को तो तुम ही समझ पाए हो हम तो वक्त से भी वक्त से नहीं मिल पाए हैं क्या तुम हमें कभी समझ पाए हो प्रश्न बहुत है मेरे कविता में पर प्रश्न चिन्ह नहीं लगाऊंगा । । कुछ बातें हैं मेरे उन लम्हों की जीने में तुम्हें नहीं सुनाऊंगा वक्त नहीं है तुम्हारे पास यह सुनने की क्योंकि कदर ही नहीं थी तुम्हें उन दिनों की
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