विधाता छंद
बताओ मैं कहाँ जाऊँ। रहे थे लोग छाया बन, बहुत कुछ पास थे मेरे । हुए वे तो पराये सब, घटे धन दुःख आ घेरे ।। तुम्हीं रास्ता दिखाओ प्रभु, बताओ मैं कहाँ जाऊँ। सभी छोड़ा अकेला अब, तसल्ली मैं कहाँ पाऊँ।। शरण तेरी भली अच्छी, जगत सारा छलावा है। तुम्हीं हो एक मेरा तो, नहीं कोई अलावा है।। भजन तेरा करूँ हरपल, चरण में रह करूँ पूजा। करो विश्वास मेरा तुम,नहीं कोई यहाँ दूजा।। नरेंद्र सिंह, 10.04.2025
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