बेटी हूं फौजी के सपने देखे हैं
बेटी हूं, पर कमजोर नहीं, सीने में हैं तूफानों की रवानी कही। गुड़ियों से नहीं, बंदूकों से खेला हैं ख्वाबों में, फौजी के सपने देखे हैं मैने जवानी में। बेटी हूं फौजी के सपने देखे हैं मैने। जब तिरंगा लहराता है ऊंचाई पर, दिल धड़क उठता है उस छांव में जाकर। मां कहती है "बेटी ये काम कठिन है," मैं कहती हूं ", मेरा जज्बा ही मेरा वतन है।" बेटी हूं फौजी के सपने देखे हैं मैने। पैरों में चप्पल नहीं, हौसलों की जंजीर है, हर दर्द पर मुस्कान, यही मेरी तस्वीर है। ना मेकअप, ना शोहरत का जूनून है, बस यूनिफार्म में तिरंगे का सुकून है। बेटी हूं फौजी के सपने देखे हैं मैने बेटी हूं, मगर देश की शान बनना चाहती हूं, मिट्टी की खुशबू में पहचान बनना चाहती हूं। हर सीमा पर, हर रण में आवाज मेरी गूंजे, "जय हिंद!" बोले दिल यही अरमान है मेरे। बेटी हूं, फौजी के सपने देखे हैं मैने। ❤️ जय हिंद 🇮🇳 वंदे मातरम 🇮🇳 ❤️
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