मतलबी....
ना फन उठाता, ना फुँकारता, बस धीरे-धीरे जहर उगलता जाता। चेहरे पर मासूम, दिल में चाल, हर कदम पर रखता है दुश्मनी की चाल। “मैं तो तुम्हारा भला चाहता हूँ…” कहकर सबसे पहला वार वही करता है। काम से उसका नाता नहीं, पर अफवाहों से रिश्ता गहरा बना लिया वहीं। ऐसे साँपों से डरना जरूरी है, क्योंकि ये डसते नहीं — सीधे करियर की कमर तोड़ते हैं… बिना आवाज़ किए।
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