एक मुलाकात
मिली नजर आज फिर उनसे यूं ही चलते राहों में, कुछ तो कहने की तड़प थी शायद उनकी निगाहों में, वो भी दिन थे जब मुझको देख वो मुस्काती थी, देख मुझे उमंग से सखियों से जा बतलाती थी, आज भी है प्यार मगर अब पहले जैसी बात कहां, चाहत है उन आंखों में पर प्यार की बरसात कहां, जी करता रहा हाथ पकड़ फिर से उन्हें मना लूं मैं, मैं भी नहीं हूं खुश बिछड़ कर उनसे ये बतला दूं मैं, दिल के इन हसरतों को मुश्किल से संभाला मैंने, मानो जैसे दिल की चाहत को दिल में ही दफनाया मैंने, जी भर देखने की थी चाहत उन्हें चंद पहर कुछ लमहों में, काश मिटा सकता सारी दूरी भर के उनको बाहों में..!!
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