मिले थे तुम
मिले तुम फिर उसी मोड पर मगर अब वो राह कही ओर जातीं हैं वो लम्हा जब तुमने छोडा साथ मेरा अब वो रात दिल में गहरी होती है। मुलाकात हुई यू आज बरसों के बाद उसी मोड़ पर , अब पलट कर ना देखा तुमने एक बार भी ख़ुद को क़रीब पाकर भी दूरी कैसी थी! कैसी वो मजबूरी थी क्योंकि आज उनकी नज़र हम से ना मिले इसलिए आंखों कहीं ओर थी । मिले थे तुम बहुत दिनों बाद आज उसी मोड पर अब वो रास्ते कहीं ओर जाते है। छोडा साथ जिन रास्तों पर गुज़र कर कभी हम भी ना गए। मोड के आगे गली गली का वो आखिरी मकान जहां कभी चांद भी ज़मीं पर उतरा करता था। अब तो वो मोड ,वो गली अजनबी बन गए हैं
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