परिशुद्ध प्रेम
जीवन में प्रकाश का एक भाग तुमसे ही है खुशी का एक एहसास तुमसे ही है हो तुम मेरे हरि की ही रचना लेकिन तुम्हारी चर्चा तो मैने हरि से भी की है नही जानता, तुम सत्य हो या हो सपना या सिर्फ हो मेरी कविता की एक कल्पना प्रेम का एक भाग मैं तुमको समर्पित करता हूं आज भी मैं तुमसे परिशुद्ध प्रेम करता हूं
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