मेरी शायरी
दो ख़ूबसूरत लम्हों में अपना पूरा जहां बासा दिया। नदिया के बहते पाने में हमने भी डुबकी लगा ली। सपने सजके हमेशा के वक्त के आगे निकल गए। सदियों से खामोश सपनो को आवाज़ देकर हमने भी अपने कहानी को लफ्जों में उतार लिया।
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