खफा।
तू हर बात पे ही मुझ से खफा लगता है तेरा रूठना मुझे जैसे कोई सज़ा लगता है ख्वाब में, सोच में, मेरी हर सांस में हो तुम तू ही ज़िन्दगी है मेरी, तू ही खुदा लगता है दिल भी दुखाता है, फिर भी तेरी तलब रहती है क्यों लौट तेरे पास ही आता हूँ, क्या लगता है मुझपे यकीं ना सही, खुद पे तो ज़रूर होगा दिल से पूछ, क्या मेरे साथ अच्छा लगता है
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