बेटी थी वो.........
ना इस घर की कहलाई ना उस घर की कहलाई बेटी थी वो साहब ,हमेशा पराई ही कहलाई।। ना तुम समझ सके ना जमाना हमेशा मिलता रहा उसे ही ताना ।। उसके आंसू ना तुम समझे ना जमाना क्योंकि नही गया उसे अभी तक अपनाया।। इतना होने के बाद भी ना कल उसका था न आज बेटी थी वो साहब हर पल रह गई उदास।। ~kusumvasita
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