झूठ
कैसा है यह ताना-बाना दुनिया में, गम का ही है सिर्फ खजाना दुनिया में।। उलझे धागों को सुलझाने की उलझन, सबके दिल का यही फसाना दुनिया में।। दिल में है तूफान समंदर आंखों में, फीका है सबका मुस्काना दुनिया में।। झूठा है बहलावा ये अपनेपन का, झूठ पे फिर कैसा इतराना दुनिया में।। मिले हिकारात यहां मुफलिसी को हरदम, सरमाया ही है पैमाना दुनिया में।। लाख जमाना नफरत करले-जाने दो, प्रेम की तुम बगिया महकना दुनिया में।। रमन रात्रि 8:34 26 अक्टूबर 2025
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