मेरा सबकुछ तुम
पंछियों जैसी आवाज तुम्हारी, फूलों की तरह खूबसूरती, पहाड़ जैसी कठोर तुम, नदी जैसी निर्मल भी, तुम जैसे बहती हवा, अकेले भी और सबके साथ भी, पेड़ जैसी सहायक तुम, लता जैसी नाजुक भी, सूरज जैसी रोशनी तुममें, और चांद जैसी शीतलता, बस इसीलिए कहता हु, मेरा कुछ नहीं तुम और मेरा सबकुछ भी ~Rohit💞Shreya
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