राजनीती
राजनीती ========================= राजनीती क्या गंदी आदत है, एक बार लग जाये फीर तो, फिर पैसा कहासे आरहा, वो कहा सोचता है. आता है राजनीती मे, कार्यकर्ता बणकर, मगर कार्य हीन बणकर, सिर्फ पैसा खीचने की मशीन बण जाता है. यही हाल है यहा का, राजनीती मे सब चोर है, कोई कम हो या जादा, सफ गद्दार है. ये राजनीती है यारा, यहा गद्दार जादा शरीफ कम है,यहा यहा हर कोई बीकता, कोई लाखो मे तो कोई करोडो मे. ये राज नीती है यारो, यहा सब चोर है, बीना मेहनत पैसै कमावने का, येभी क्या खुब खेल है......, क्या खुब खेल है. ===================
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