स्वतंत्रता...
स्वतंत्रता जितना बड़ा शब्द है उतनी ही बड़ी जिम्मेदारियां है। स्वतंत्रता का अर्थ केवल मुक्ति या आज़ादी नहीं, बल्कि युक्ति है— युक्ति, जो हमें बंधनों के साथ जीना सिखाती है; ऐसे बंधन जो व्यवस्था, सामंजस्य और जीवन की गरिमा बनाए रखें। वर्तमान युवा पीढ़ी ने स्वतंत्रता का अर्थ केवल ‘मनमर्जी’ समझ लिया है, जबकि असल में स्वतंत्रता कोई चीज़ नहीं जिससे तुम छुटकारा पाना चाहते हो। स्वतंत्रता है कर्तव्य का स्वेच्छा से निर्वहन। यह जिम्मेदारी है— अपने समाज के प्रति, अपने धर्म और संस्कृति के प्रति, अपने परिवार और राष्ट्र के प्रति, और हर उस जीव के प्रति जो तुम्हारे अस्तित्व से जुड़ा है। स्वतंत्रता का मूल्य तभी है जब वह अनुशासन के साथ जुड़ी हो। बिना अनुशासन की स्वतंत्रता सिर्फ अराजकता है, और अराजकता धीरे-धीरे स्वतंत्रता को ही निगल जाती है। स्वतंत्रता कोई अधिकार नहीं जिसे तुम मांग कर पा लो, यह एक विश्वास है जो समाज तुम पर करता है कि तुम अपने विवेक और नैतिकता से सही निर्णय लोगे। जब तुम अपनी स्वतंत्रता का प्रयोग दूसरों की स्वतंत्रता छीनने के लिए करते हो, तब तुम न केवल अपने अधिकार खोते हो, बल्कि स्वतंत्रता की आत्मा का भी अपमान करते हो। इसलिए, स्वतंत्रता का सच्चा स्वरूप है— कर्तव्य, नैतिकता, संवेदनशीलता और आत्मसंयम का संगम।
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