चाँद की तारीफ 🌕
तारीफ मे क्या कहूँ मैं चाँद के 💐🌕 कितना खूबसूरत है 🌕🌙 ना घूँघट, ना बुरका फिर भी ना छोड़ी कभी मर्यादा 🌕 नही रख सकता इसे कोई बांध के तारीफ मे क्या कहूँ मैं चाँद के 😍 जाति धर्म का भेद ना रखता कभी करवा चौथ का, तो कभी बन गया ईद का🌙☪️🕉️🛐🧕 कहते हैँ दाग़ है चाँद पर, फिर भी नायाब है वो अमावस मे रहता गायब, तो पूर्णिमा को लगता लाजवाब है वो 🌕 ग्रहण लगकर भी रहता सीना तान के 🌓🌔🌕🌖🌗🌘 तारीफ मे क्या कहूँ मैं चाँद के इंसाँ की पहुँच से दूर है तो खैरियत है उसकी ज़मीन पर होता तो टूटकर विवादों मे होता अदालत की सुनवाइयों मे होता अख़बारों की सुर्खियों मे होता सिन्हासन पर बैठा वो आसमान के🌕 तारीफ मे क्या कहूँ मैं चाँद के 💐😊😍🌕
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