जिम्मेदारी में बहन
एक कमी सी थी, कब पूरी हो गई पता नही एक अजनबी सी थी कब नबी हो गई पता नही। डरते जो बाते बताने, न लगे डर बहन से बताने में, हंसकर, बोलकर, साथ बैठकर अच्छे से समझना यूं एक कमी सी थी कब पुरी हो गई पता नही। रख छोटी छोटी बातों का ध्यान मेरे खयाल हर बातों का मेरे, न चाह कुछ लेने का, न कुछ ज्यादा मांग है एक कमी सी थी कब पुरी हो गई पता नही। खुद से ज्यादा सबका हो जाना, आई परिस्थिति में ढल जाना, न कर पाए कोई और उसके सिवा लोगो की बातों को बीना बोले समझ जाना, एक कमी सी थी कब पुरी हो गई पता नही। बचपन से इन जिम्मेदारियों से बधी रहना कैसे कर पाती, कोई और न उसके सिवा, लोग कहते पराए घर की, सह कैसी पाती मोहताज नही कुछ रिश्ते, साथ है, साथ रहेंगे, खडे हमेशा एक दूजे के साथ रहेंगे।
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