मेरी परछाई
एक नन्ही परछाई, दीवार पर चलती, ज़िन्दगी की इस पहेली में, रंग बदलती। कभी ऊँची, कभी छोटी, मेरे साथ रहती, हर कदम पे, मेरे संग बहती। अभी तुम छोटे हो, मेरी छाया में छिपते, दुनिया के शोर से, बचकर निखरते। जब तुम बड़े हो जाओगे तुम्हारी छाया, मुझसे ऊपर रहे, दीवार पे लगे ये गहरे निशान, मेरी प्रार्थनो का, एक छोटा सा दान। एक साथ, हमेशा के लिए, तेरी छाया, मेरी ज़िन्दगी के लिए। तुम मेरे बेटे, मेरी जान, मेरी छाया का, ये प्यारा सा अभिमान
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