फौजी से मोहब्बत कर बैठी हूं
ना जाने कैसे वह दिल में उतर गया वर्दी में सजा, जैसे खुद वतन निखर गया। नजर मिली तो लगा ये कोई आम इश्क नहीं, अपने फौजी से मोहब्बत कर बैठी हूं मैं। जब वह "जय हिंद" कहता है, तो मेरा दिल सलाम करता है। उसकी मुस्कान में हैं वीरता की चमक, और आंखों में मिट्टी की महक। वह जब सीमा की ओर जाता है, तो मेरा गर्व आसमान छू जाता है। ना शिकायत, ना गिला बस दुआएं देती हूं, हर सूरत में उसे सलाम करती हूं । कभी पत्र में नाम लिखती हूं उसका, कभी आसमान में ढूंढती हूं उसका चेहरा। हर रात तारे से कहती हूं मैं "उसे मेरी याद दिला देना जरा"। हा मोहब्बत तो की है सपने कभी, पर फौजी से इश्क कुछ और ही चीज है। जहां जुदाई भी इबादत लगती है, इंतजार देशभक्ति जैसी चीज है। ब वह देश के लिए लड़ता है, बस मैं उसके लौटने की आस में जीती हूं, ना जाने कैसा रिश्ता है ये पर सच कहूं......... अपने फौजी से मोहब्बत कर बैठी हूं मैं 🇮🇳 जय हिंद वंदे मातरम 🇮🇳
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