उलझन
कोई तो हो जो रोक दे समय की इस चक्र को। कोई तो हो जो थाम ले इस पल को।। अब भी उलझनों की उफान उठ रही इस दिल में। जैसे कोई तिल तिल सांसे चीन रहा हो।
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