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होगी नाराज़ मै तुमसे एक दिन इस बात पर जब रूठी थी मै तो तुमने मनाया क्यू नहीं? कहते थे तुम तो करते हो मुझसे प्यार, जो दिखाई मैंने नखरा तो तुमने उठाया क्यू नहीं? मुंह फेर कर खड़ी थी जब मै वहा, बुलाकर पास सीने से लगाया क्यू नही? पकड़ कर तेरे हाथ पूछना है तुमसे, हक अपना मुझ पर तुमने जताया क्यू नहीं। इस धागे का एक सिरा तुम्हारे पास भी तो था, उलझा था मुझसे तो तुमने सुलझाया क्यू नहीं।
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