सच्चाई
ज़िन्दगी क्यों जीना है, हर वक़्त तो निकालना पसीना है। क्यों ऐसा कि अमीरी की ख्वाहिश हम करें, पर हाथ में न पैसा, बस फकीरी ही धरें। ठीक है, समय लगेगा, पर मेहनत रंग लाएगी, मुफ़्त में जो मिला, उसकी क़ीमत न समझ पाएगी। कभी तो उसके दादा ने बहाया होगा पसीना, तभी तो आज वो जी रहा है रंगीन सपना सीना। जान लो, आसान नहीं है ये ज़िन्दगी का सफ़र, छोटी-छोटी कोशिशें ले जाएँगी ऊपर। ध्यान काम पे रखो, मत करो बेवजह विचार, हर लम्हा सिखाता है, बस चलो करें अभ्यास बार-बार। ज़िन्दगी कभी न कहेगी "मत जी," जो मिली है, उसे संवारो अभी। तुमने गरीबी तो चाही न थी, पर अगर लापरवाही से ज़िन्दगी बरबाद कर दी। तो अगली पीढ़ी भी न गाएगी तुम्हारी "वा-वा-ई..."
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