शीर्षक: एक शपथ लीजिये
आज ही प्रथम दिवस पर,एक शपथ लीजिए। जगाएँ शांति के अलख,नेक कार्य कीजिए।। आपसी बैर-भाव सब,आज ही जलाइए। द्वेष-जलन को दहनकर, प्यार को जगाइए।। मानव को मानव समझ, उसे भाव दीजिए। बाँटते रहें प्रेम रस, उस रस को पीजिए।। आपसी मनमुटाव को, सदा सदा टालिए। अनिश्चित है यह जीवन, अहं नहीं पालिए।। कौन कहाँ रहेगा कब,मर्म यह तलाशिए। उसको गले लगाइए, रहता जो हाशिये।। अपने जैसा मानकर, गैरों को मानिए। जनकल्याण करने का,मन ही मन ठानिए।। नरेंद्र सिंह
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