खैर कोई मेरा होता
खैर कोई मेरा होता, हरेक दिल बात कहने को होता। छुपा रहता जो अंदर गहरा, वो ही मेरे ख्वाबों में सवेरा। खैर मिलता नहीं हर किसी को, सपनों की राह चुननी होती जो। लगता है बतादू, ना हो जाए कभी देर, उसको बत, लगता है, जो तुम मेरे नहीं… खैर।
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