खत्म हुई विरह की बेला
नूर वो उस चांद का, मैं धरती वो आस्मां , सागर सी उसकी आँखें , जी चाहे बस डूब जाने का। वो चले तो धरती हिल जाए, हँसे तो सांसे थम जाए , एक झलक पे वारी जाऊ, जरा देखो मेरे पिया आए। नैना तरस गए मिलन को , आई ना मेरी याद तुमको, बन गए हो परदेशी बाबू , भूल गए अपनी जोगन को। बन ठन आए मेरे पिया जी , मैं पकाऊ सब्जी भाजी, देख लजाऊ पर्दा पीछे , भूख लगी खा लो खाना जी । खत्म हुई विरह की बेला , आसूं झलके जैसा झरना , सपना तो ना देख रही मै, क्या सच में आ गए मेरे पिया ??
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